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छपरा में शिक्षा विभाग के डीपीओ अजीत अमर पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप, करोड़ों के लेन-देन की जांच शुरू

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सारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अजीत अमर आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच के घेरे में हैं। जांच रिपोर्ट में करोड़ों रुपये के बैंक लेन-देन और संपत्ति से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं।

छपरा/आलम की खबर:सारण जिले के शिक्षा विभाग में पदस्थ जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा, योजना एवं लेखा) अजीत अमर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर हुई प्रशासनिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में अधिकारी और उनके परिवार से जुड़े बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट अब आगे की कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग के मुख्यालय भेज दी गई है।

मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन की ओर से उप विकास आयुक्त के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति को आरोपों की जांच कर पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच टीम ने दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और शिकायत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करने के बाद अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, अजीत अमर की लगभग 32 महीने की सेवा अवधि के दौरान वेतन से प्राप्त आय करीब 27.43 लाख रुपये बताई गई है। वहीं दूसरी ओर इसी अवधि में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में करीब 2.51 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन की जानकारी जांच में सामने आने की बात कही गई है। इसी अंतर को लेकर आय और संपत्ति के स्रोतों की विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई गई है।

जांच में संपत्ति से जुड़े कई बिंदुओं की भी समीक्षा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अजीत अमर की पत्नी के नाम पर सारण जिले के एकमा प्रखंड क्षेत्र में करीब 120 कट्ठा जमीन खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 41.50 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा मकान निर्माण पर भी बड़ी राशि खर्च किए जाने का उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।

मामले की शुरुआत एक संवेदक की शिकायत के बाद हुई थी। शिकायतकर्ता ने जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि काम दिलाने के नाम पर उससे राशि की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपों की जांच के लिए कमेटी गठित की गई।

जांच समिति ने शिकायतकर्ता और अधिकारी के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की। इसके अलावा बैंक खातों से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध कागजातों की समीक्षा की गई। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में आगे भी विस्तृत जांच की जरूरत बताई है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अधिकारी, उनकी पत्नी और परिवार से जुड़े सदस्यों की संपत्तियों और बैंक खातों की और गहराई से जांच कराई जाए। इसके लिए बैंक, निबंधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों से रिकॉर्ड प्राप्त करने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि संपत्ति और आय के स्रोतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

जिलाधिकारी स्तर से रिपोर्ट को शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन के पास भेज दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई विभागीय स्तर पर तय की जाएगी। शिक्षा विभाग इस मामले में रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद नियमों के अनुसार निर्णय लेगा।

जिला शिक्षा पदाधिकारी निशांत किरण ने बताया कि जांच रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए विभाग को भेज दिया गया है। अब इस मामले में जो भी निर्णय होगा, वह राज्य मुख्यालय स्तर से लिया जाएगा।

फिलहाल अजीत अमर पर लगे आरोपों को लेकर विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ गई है। जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि विस्तृत जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला एक बार फिर सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर प्रशासनिक निगरानी की आवश्यकता को सामने लाता है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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सरकारी पद पर बैठे अधिकारियों की संपत्ति और आय के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। छपरा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अजीत अमर से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आए वित्तीय लेन-देन और संपत्ति संबंधी तथ्यों के बाद अब मामला शिक्षा विभाग के मुख्यालय पहुंच चुका है। किसी भी अधिकारी के खिलाफ अंतिम निर्णय केवल जांच के निष्कर्षों और नियमों के आधार पर ही लिया जाता है।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जांच एजेंसियां और विभाग सभी दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा करें, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। पारदर्शी जांच से जहां दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का रास्ता साफ होता है, वहीं गलत आरोपों की स्थिति में अधिकारी को भी न्याय मिल सकता है।

सरकारी व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है कि ऐसे मामलों में जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कदम उठाता है।

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